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बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के मरीज को हमेशा दवा खानी पड़ती है, यह गलतफहमी है
हाइपरटेंशन साइलेंट किलर है। जिसे à¤à¥€ यह बीमारी है, उस पर यह धीरे-धीरे अटैक करता है। अगर लापरवाही हà¥à¤ˆ तो संà¤à¤²à¤¨à¥‡ का मौका à¤à¥€ नहीं देता है और मरीज असमय मौत के मà¥à¤‚ह में चला जाता है। इस बीमारी में लोग खà¥à¤¦ लापरवाही करते हैं। जब हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हो जाती है, तब डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की सलाह पर दवा लेना शà¥à¤°à¥‚ कर देना चाहिà¤à¥¤ इसके बाद मरीज यह कहते हैं कि अà¤à¥€ कोई दूसरा उपाय बताइà¤, नहीं तो जिंदगी à¤à¤° दवा लेनी होगी। इसी गलफत में पड़कर यह बीमारी गंà¤à¥€à¤° हो रही है। उकà¥à¤¤ बातें कंसलटेंट कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉ. वरà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° ने कही। वे वरà¥à¤²à¥à¤¡ हाइपरटेंशन डे के पूरà¥à¤µ पतà¥à¤°à¤•ारों से बातचीत कर रहे थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ किया कि 14090 से अधिक बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° होने पर मरीज को हाइपरटेंशन कहा जाता है।उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की बीमारी नियमित फिजिकल वरà¥à¤• और हेलà¥à¤¥à¥€ फूड से कंटà¥à¤°à¥‹à¤² हो जाती है। फिर दवा लेने की जरूरत नहीं, पर समय-समय पर जांच जरूरी है। डॉ. कà¥à¤®à¤¾à¤° ने बताया कि हाई बीपी से हारà¥à¤Ÿ अटैक, बà¥à¤°à¥‡à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• (लकवा), किडनी फेलà¥à¤¯à¥‹à¤°, बà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤‚डनेस की बीमारी हो सकती है। हमारे देश में करीब 33 फीसदी शहरी और 25 फीसदी गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ लोग हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ है। यह à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥‡à¤®à¤¿à¤• की तरह है। 35 साल के बाद लोग à¤à¥€ इसकी चपेट में आने लगे हैं। जागरूकता की कमी के कारण यह समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ रही है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मोटापा, फासà¥à¤Ÿ फूड या जंक फूड का सेवन, अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• नमक का सेवन, किडनी, डायबिटीज की बीमारी के कारण बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° बढ़ता है। महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बातय यह है कि लेकिन, 90 फीसदी लोगों में इस बीमारी का कारण अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यह à¤à¥€ कहा कि सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग और अलà¥à¤•ोहल का नियमित सेवन à¤à¥€ जिमà¥à¤®à¥‡à¤µà¤¾à¤° है। जो लोग शराब पीते हैं, वे दो पैग ले सकते हैं। इससे हारà¥à¤Ÿ हेलà¥à¤¦à¥€ रहता है। इसके अलावा लोगों को ताजा फल, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, मछली का सेवन अधिक करना चाहिà¤à¥¤ यह शरीर की सà¥à¤«à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ को बनाठरखते हà¥à¤ शरीर को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, लोग अपनी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ में बदलाव कर हाइपर टेंशन से बच सकते हैं। इसमें फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ का बड़ा हाथ है। साथ ही सकारातà¥à¤®à¤• सोच à¤à¥€ जरूरी है।
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